witnessindia
Image default
health Science Tech World

सुबह की नींद प्यारी होती है दिमाग पर कुछ यूं असर डालती है अलार्म की आवाज

नई दिल्ली (ईएमएस)। ज्यादातर लोगों को सुबह की नींद प्यारी होती है, जिसकी वजह से उनके लिए उठना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में इस नींद को तोड़ने के लिए वह अलार्म सेट करते हैं। लेकिन आपने गौर किया होगा कि भले ही आप अलार्म में अपनी फेवरिट ट्यून लगा लें, परंतु यह आपको इरिटेट कर देती है। इसी के बारे में अब वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि अलार्म की आवाज़ सुनने से हमारे दिमाग पर क्या असर होता है। इस रिसर्च से स्किट्सफ्रीनिया जैसे मनोरोगों का पता लगाने में भी सहायता मिलेगी। ऐसी बीमारियों में मरीज कुछ आवाजों के लिए अजीब सा रिस्पॉन्स देते हैं। एक जर्नल में छपी स्टडी में पता चला कि अलार्म जैसे कार हॉर्न या किसी के चिल्लाने की आवाज रिपीटिव साउंड फ्लक्चुएशंस से बने होते हैं, जिनकी फ्रीक्वेंसी 40 और 80 हर्ट्ज होती है। उन्होंने पता लगाने की कोशिश की कि किस हद तक ये आवाजें लोगों को पसंद नहीं आतीं।

रिसर्च से स्किट्सफ्रीनिया जैसे मनोरोगों का पता लगाने में भी सहायता मिलेगी।

Morning sleep is lovely, it has some effect on the brain.
Morning sleep is lovely, it has some effect on the brain

इसके लिए वैज्ञानिक ने इन आवाजों से उत्तेजित हुए दिमाग के हिस्सों का अध्ययन किया। उन्होंने हिस्सा लेने वाले लोगों से पूछा कि कब उन्हें साउंड अच्छा लग रहा है और कब बुरा और इसके लिए उन्होंने अलग-अलग फ्रीक्वेंसीज का साउंड सुनाया। इसमें शामिल वालों के जवाब के आधार पर पता लगा कि बुरे लगने वाले साउंड की अपर लिमिट 130 हर्ट्ज है। इसके ऊपर सुना जाने वाला साउंड सिर्फ एक लगातार चलने वाली आवाज की तरह सुनाई देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार 40 से 80 हर्ट्ज का साउंड लोगों से बर्दाश्त नहीं होता, जो कि अलार्म, इंसानों और बच्चों के चिल्लाने की फ्रीक्वेंसी होती है। अलार्म में यही रिपीटीटिव फ्रीक्वेंसीज होती हैं, जो दर्शाती हैं कि अटेंशन की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने बताया कि 40 से 80 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी में दिमाग का वह हिस्सा ऐक्टिवेट नहीं होता जो सामान्य आवाज में होता है, बल्कि ज्यादा अडवांस्ड हिस्सा ऐक्टिवेट हो जाता है। यह बात भी इंट्रेस्टिंग है कि अलार्म में काफी पहले से यह फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल होती आ रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इन फ्रीक्वेंसीज पर जरूर कुछ होता है औऱ कई बीमारियों जैसे अल्जाइमर्स, ऑटिजम और स्किट्सफ्रीनिया में दिमाग 40 हर्ट्ज पर अजीब रिस्पॉन्स देता है।

Related posts

स्पीकर पद पर निर्विरोध चुने गए कांग्रेस प्रत्याशी पटोले, भाजपा ने वापस लिया नाम

Publisher

अलका लांबा ने आप पार्टी से दिया इस्तीफा

Publisher

वायु प्रदूषण से लोग हो रहे दिल की बीमारी का शिकार

Publisher

Leave a Comment