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शी के स्वागत के लिए चेन्नई पहुंचे पीएम मोदी- महाबलीपुरम

चेन्नई (ईएमएस)। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और कश्मीर पर चीन के लगातार विरोधाभासी बयानों के बीच चेन्नई के निकट स्थित महाबलीपुरम में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली शिखर बैठक में व्यापार संतुलन, आरसीईपी, सीमा विवाद और 5-जी जैसे मुद्दों पर प्रमुख रुप से चर्चा होगी। बैठक के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने की संभावना नहीं है। चीन ने कश्मीर से अनुच्छेद हटाए जाने का विरोध किया था, इस मुद्दे पर भारत की चीन से अलग राय है। शी जानते हैं कि अगर बैठक में मुद्दा उठा तो भारत अपने पूर्व रुख का बचाव करेगा और बैठक में गतिरोध पैदा हो जाएगा। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी पूर्वाह्न 11 बजे ही चेन्नई पहुंच गए हैं, जहां वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अपराह्न लगभग दो बजे स्वागत करेंगे। पीएम मोदी और शी जिनपिंग चेन्नई से शाम 5:30 बजे महाबलीपुरम के लिए जाएंगे।

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और कश्मीर पर चीन के लगातार विरोधाभासी बयानों के बीच चेन्नई के निकट स्थित महाबलीपुरम में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

शी के स्वागत के लिए चेन्नई पहुंचे पीएम मोदी, शिखर बैठक का गवाह बनेगा महाबलीपुरम
शी के स्वागत के लिए चेन्नई पहुंचे पीएम मोदी, शिखर बैठक का गवाह बनेगा महाबलीपुरम

वुहान के बाद दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक के अजेंडे में व्यापार, आसियान देशों के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार, सीमा विवाद और 5 जी का मुद्दा प्रमुख रुप से उठाया जाएगा। कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है, लिहाजा पीएम मोदी इसकी चर्चा नहीं करेंगे। अगर शी जिनपिंग इसे छेड़ते हैं तो भारत उन्हें अपने पक्ष से वाकिफ कराएगा।मोदी-शी शिखर बैठक अनौपचारिक है, लिहाजा किसी समझौते पर दस्तखत नहीं होंगे लेकिन दोनों देश उस दिशा में आगे जरूर बढ़ेंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग आपसी विश्वास बढ़ाने वाले कुछ कदमों का ऐलान कर सकते हैं। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति को व्यापार में कुछ छूट की पेशकश कर प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा वह चीन के साथ व्यापार घाटे के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं।अप्रैल 2018 में वुहान समिट के दौरान पीएम मोदी ने चीन से कहा था कि वह भारत से चीनी और चावल का आयात करे। इसके बाद से उसने इन दोनों का भारत से आयात शुरू भी कर चुका है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा घटा तो है, लेकिन व्यापार संतुलन के लिए अभी और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

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2017-18 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 60 अरब डॉलर था जो 2018-19 में घटकर 53 अरब डॉलर पर पहुंचा है। भारत का कपड़ा और स्टील उद्योग इस बात को लेकर डरा हुआ है कि बहुत ज्यादा आयात से उनके बिजनेस को नुकसान पहुंचेगा। दूसरी तरफ भारत की फार्मा इंडस्ट्री को उम्मीद है कि उसे चीनी बाजार में और ज्यादा पहुंच मिलेगी।आरसीईपी एक प्रस्तावित मेगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है जिस पर 10 आसियान देशों और चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया व न्यू जीलैंड के बीच बातचीत चल रही है। अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के बीच चीन चाहता है कि जल्द से जल्द आरसीईपी को अंतिम रूप दिया जाए। उम्मीद की जा रही है कि नवंबर तक इस दिशा में कुछ ठोस प्रगति दिखने लगेगी। आरसीईपी के कम से कम 11 सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा (निर्यात से ज्यादा आयात) है, जो नई दिल्ली की प्रमुख चिंता में शामिल है। मोदी-शी शिखर वार्ता में आरसीईपी का मुद्दा काफी अहम रहने वाला है।मोदी-शी अनौपचारिक शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी। एनएसए अजित डोभाल और चीन के विशेष प्रतिनिधि यांग जीचे के बीच दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर बातचीत हो सकती है। चीन ने लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने का विरोध किया है।

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इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश पर भी वह दावा करता रहा है। खास बात यह है कि इंडियन आर्मी फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में ही सैन्य अभ्यास हिम विजय कर रही है।दोनों शीर्ष नेताओं की बातचीत में 5-जी नेटवर्क का मुद्दा भी शामिल है। खास बात यह है कि भारत ने चीनी कंपनी हुवावेई को 5जी नेवटर्क के डेमो के लिए मंजूरी दे दी है। जबकि, अमेरिका ने हुवावेई के 5-जी को प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका नहीं चाहता कि भारत हुवावेई को 5-जी ट्रायल की मंजूरी दे। शिखर बैठक के दौरान शी जिनपिंग का जोर 5-जी मुद्दे पर जरूर रहेगा। इसके अलावा अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत के बीच समुद्री सुरक्षा पर साझेदारी को लेकर चीन अपनी चिंताओं से भारत को वाकिफ करा सकता है। जहां तक कश्मीर मुद्दे का बात है, तो भारत अपने आंतरिक मुद्दे को चीन के साथ शायद ही उठाए। ध्यान देने की बात है कि चीन ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का विरोध किया था और भारत से वह इस मुद्दे पर सहमत नहीं है। चीन की राय को भारत ने पूरी तरह से खारिज किया है। हालांकि दोनों देशों के बीच समिट में यह मुद्दा उभरता है तो फिर समिट में ही गतिरोध पैदा होने की आशंका है।

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