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विदेशी दौरों पर गुलाबी गेंद से खेलने शायद ही तैयार हो भारतीय टीम

कोलकाता (ईएमएस)। बीसीसीआई के नये अध्यक्ष सौरभ गांगुली की पहल से भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू धरती पर गुलाबी गेंद से एक टेस्ट जरुर खे लिया है पर अभी विदेशी धरती पर भारतीय टीम शायद ही गुलाबी गेंद से मैच खेलने के लिए तैयार होगी। इसका कारण दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद को देख पाना भी है। इस परेशानी से टीम को कोलकाता में गुजरना पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारतीय टीम भविष्य में विदेशी दौरे के दौरान गुलाबी गेंद से टेस्ट खेलने के कदमों का विरोध करेगी। बीसीसीआई यदि टीम की प्रतिक्रिया लेता है, तो खिलाड़ी गुलाबी से नहीं, बल्कि नियमित लाल गेंद से ही खेलने की बात करेंगे। भारतीय टीम कोलकाता डे-नाइट टेस्ट से पहले ही गुलाबी गेंद को लेकर चिंतित थी।

बीसीसीआई यदि टीम की प्रतिक्रिया लेता है, तो खिलाड़ी गुलाबी से नहीं, बल्कि नियमित लाल गेंद से ही खेलने की बात करेंगे।

विदेशी दौरों पर गुलाबी गेंद से खेलने शायद ही तैयार हो भारतीय टीम
विदेशी दौरों पर गुलाबी गेंद से खेलने शायद ही तैयार हो भारतीय टीम

वह गुलाबी गेंद से टेस्ट से खेलने के लिए खुले दिमाग से मैदान पर उतरी भी। अब माना जा कहा है कि दिन-रात टेस्ट का अनुभव हासिल करने के बाद भारतीय खिलाड़ी भविष्य में दिन-रात का टेस्ट खेलने के मूड में नहीं हैं। भारतीय टीम प्रबंधन के एक सदस्य ने कहा , ‘हमें लगा कि गेंद एक मुद्दा है। दृश्यता के अलावा गेंद भी बहुत सख्त थी। देखिए बांग्लादेश के बल्लेबाज को कैसे चोट लगी। फील्डिंग के दौरान भी गेंद को देखना एक चुनौती थी। ऐसे गेंदबाज जो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल सकते हैं, उनके लिए इस गेंद को संभालना आसान नहीं था। यह गेंद नियमित लाल गेंद से ज्यादा तेजी से निकलती है। इससे साफ है कि दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद को देख पाना आसान नहीं था।’

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