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राष्ट्रपति भवन में जर्मन चांसलर का स्वागत, कुर्सी पर बैठ कर सुना राष्ट्रगान

नई दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रपति भवन में जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल का औपचारिक स्वागत किया गया। जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल स्वागत समारोह के दौरान लगातार कुर्सी पर ही बैठी रहीं। उनके गड़बड़ स्वास्थ्य की वजह से उन्हें यह विशेष छूट दी गई। नियमानुसार स्वागत समारोह में राष्ट्राध्यक्ष खड़े होकर राष्ट्रगान के प्रति अपना सम्मान प्रदर्शित करते हैं। जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल पांचवीं द्विवार्षिक अंतर सरकारी वार्ता (आईजीसी) के लिए भारत आई हैं। आईजीसी के तहत, दोनों देशों के समकक्ष मंत्री अपने जिम्मेदारी के संबंधित क्षेत्रों के बारे में वार्ता करते हैं। वार्ता के नतीजों से आईजीसी को अवगत कराया जाता है जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्केल करती हैं। स्वागत समारोह में राष्ट्रगान समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर का हाथ मिलाकर अभिवादन किया और उन्हें वहां मौजूद कई अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों से मिलवाया। राष्ट्रगान के बाद मर्केल ने भारतीय दल से मुलाकात की, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल थे।

राष्ट्रपति भवन में जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल का औपचारिक स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति भवन में जर्मन चांसलर का औपचारिक स्वागत, कुर्सी पर बैठ कर सुना राष्ट्रगान
राष्ट्रपति भवन में जर्मन चांसलर का औपचारिक स्वागत, कुर्सी पर बैठ कर सुना राष्ट्रगान

मार्केल ने कहा कि मैं भारत आकर बहुत खुश हूं। हम इस बड़े देश और इसकी विविधता का सम्मान करते हैं। जर्मनी और भारत के बीच बहुत गहरे रिश्ते रहे हैं। हम इन संबंधों को आगे भी जारी रखेंगे। जर्मनी के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पीएम मोदी का परिचय खुद मर्केल ने कराया। जर्मनी की चांसलर के स्वास्थ्य को लेकर पहली बार इसी साल चर्चा शुरू हुई। यूक्रेन के राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम के दौरान भी एजेंला मर्केल थर-थर कांपने लगी थीं। हालांकि, बाद में उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि कम पानी पीने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या नहीं है।
चांसलर मर्केल को बिना सहायता के खड़े होने में कठिनाई होती है। हाल में उन्हें देश और विदेश में ऐसे स्वागत समारोहों के दौरान बैठे हुए देखा गया है, जिनमें खड़े होने की आम तौर पर जरूरत होती है। ऐसा माना जाता है कि जर्मनी से मिले आग्रह के आधार पर व्यवस्था के अनुरूप छूट दी जा रही है। जिससे कि स्वागत समारोह में मर्केल की इच्छा के साथ सामंजस्य बैठाया जा सके।

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