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रामलला विराजमान का मंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनाने की राह आसान नहीं
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रामलला विराजमान का मंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनाने की राह आसान नहीं

अयोध्या (ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया ट्रस्ट बनाकर रामलला विराजमान का मंदिर बनाने का आदेश दिया है। इसे लेकर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंभीर हैं और उनकी इच्छा के अनुरूप ट्रस्ट के गठन की तैयारी भी चल रही है। इसके बावजूद यहां राममंदिर निर्माण के लिए तीन पुराने ट्रस्टों के बीच अपने-अपने दावे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। विश्व हिंदू परिषद कह रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को मंदिर बनाने का अधिकार है, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रामालय ट्रस्ट खुद का संवैधानिक अधिकार जता रहे हैं। जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास को सरकार के ट्रस्ट में शामिल करने की बात कह रहे हैं। बता दें कि यह विवाद अदालत में होने के बावजूद विराजमान रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए तीन ट्रस्ट सक्रिय थे। सबसे पुराना साल 1985 में बना ट्रस्ट विश्व हिंदू परिषद का श्रीराम जन्मभूमि न्यास है, दूसरा विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव की पहल पर बना रामालय है। तीसरा ट्रस्ट जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण की अगुवाई में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास भी इन्हीं दोनों ट्रस्टों से इतर दावेदारी करता है।

राममंदिर निर्माण के लिए तीन पुराने ट्रस्टों के बीच अपने-अपने दावे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।

मंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनाने की राह आसान नहीं
मंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनाने की राह आसान नहीं

सबकी अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग
विहिप की अगुवाई वाले श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास हैं। इस ट्रस्ट में राम मंदिर निर्माण के लिए यहां 1990 में खोली गईं पत्थर तराशी और मूर्ति निर्माण की तीन कार्यशालाएं चलती हैं। ट्रस्ट की अरबों की जमीन है, राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के खाते में शिलादान अभियान से मिली करीब आठ करोड़ की नकदी है। मंदिर निर्माण के फैसले के बाद अयोध्या से लेकर दिल्ली तक विहिप नेता इसी ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर बनाने का दावा कर रहे हैं। उधर, छह दिसंबर 1992 को ढांचा ढहाए जाने के बाद 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव के प्रयास से द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती समेत 25 धर्माचार्यों ने अयोध्या में जन्मभूमि पर राममंदिर बनाने के लिए रामालय ट्रस्ट का गठन किया था। तब इसके संयोजक ज.गु.रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य थे। श्रृंगेरीपीठ के धर्माचार्य स्वामी भारती भी ट्रस्ट में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बनाने का कानूनी अधिकार होने का दावा कर रहे हैं। साथ ही विश्व हिंदू परिषद के ट्रस्ट को अधिग्रहण के पहले का बना होने की वजह से अवैध ठहराते हैं। वे यह भी कहते हैं कि महंत जन्मेजय शरण हमारी कार्यकारिणी में हैं।

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