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यदि कैंसर के लक्षण कम उम्र, खासकर बच्चों या युवाओं में दिखें, तो तुरंत जांच कराएं।

नई दिल्ली (ईएमएस)। हाल ही में विशेषज्ञों ने बताया कि हड्डी के कैंसर का उपचार सही ढंग से न किया जाए तो यह शारीरिक विकलांगता के साथ जानलेवा भी साबित हो सकता है। हालांकि बीते कुछ सालों में लोगों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता की वजह से पीड़ित लोगों की चिकित्सा में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। बता दें कि शरीर में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने को ट्यूमर कहा जाता हैं। इसी तरह यदि हड्डी का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाए तो उसे हड्डी का ट्यूमर कहते हैं। ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं। बिनाइन ट्यूमर, जो हड्डी के किसी भी भाग में बढ़ते हैं, लेकिन इनके शरीर के दूसरे अंगों में फैलने की आशंका कम रहती है। ये ट्यूमर एक ही जगह पर लम्बे समय तक बढ़ते हुए जगह की हड्डी को खोखला करते रहते हैं। इसके अलावा और भी ट्यूमर बनने लगते हैं, जो कैंसर नहीं होता, लेकिन इसके बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए और जरूरत पड़े तो उपचार कराना चाहिए, नहीं तो कई बार यह घातक भी साबित हो सकता है।

कई बीमारियां एक साधारण एक्स-रे से भी पकड़ में आ जाती हैं।

Bone Cancer

इसके अलावा किसी भी हड्डी में गांठ या सूजन है तो हड्डी के विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं, क्योंकि अगर वह गांठ समय के साथ बढ़ रही हो तो वह हड्डी का कैंसर भी हो सकती है। दर्द का होना, हड्डी या जोड़ में दर्द बने रहना, रात में दर्द होना या आराम करने में भी दर्द रहना। यदि ये लक्षण कम उम्र, खासकर बच्चों या युवाओं में दिखें, तो तुरंत जांच कराएं। सामान्य तौर पर हड्डी बहुत मजबूत होती है, जो आसानी से नहीं टूटती, परंतु यदि किसी वजह से हड्डी कमजोर हो गई है, तो यह आसानी से टूट सकती है। हड्डी के ट्यूमर के लक्षण हों तो सबसे पहले विशेषज्ञ को दिखाएं। कई बीमारियां एक साधारण एक्स-रे से भी पकड़ में आ जाती हैं। बीमारी की पुष्टि बॉयोप्सी के माध्यम से की जाती है। कई बार हड्डी के कैंसर में कीमो थेरेपी एवं रेडिएशन थेरेपी जरूरी होती है। स्वस्थ जीवनशैली है बहुत जरूरी स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हुए संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम बहुत जरूरी है। अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार के लक्षण, जैसे-हड्डी व मांसपेशी में गांठ, हड्डी में लगातार दर्द को नजरअंदाज न करें। इसके विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। आज के युग में चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति कर ली है और कैंसर के उपचार की उन्नत तकनीक ईजाद हो चुकी है। ऐसे में 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में प्रभावित अंग से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को हटा कर अच्छे भाग को बचाया जा सकता है। इसे ‘अंग बचाव ऑपरेशन’ यानी ‘लिम्ब र्सेंवग सर्जरी’ कहते हैं।

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