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मेट्रो के लिए 2020 तक यूरोपियन बैंक से फंड की उम्मीद भोज मेट्रो के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना फंड

भोपाल (ईएमएस)। राजधानी में चलने वाली भोज मेट्रो के लिए जनवरी 2020 तक यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक से फंड मिलने की उम्मीद है। इसकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।भोज मेट्रो प्रोजेक्ट पर करीब सात हजार करोड़ रुपए का खर्च आना है। केंद्र सरकार से यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का लोन लिया जाना है। वहीं इंदौर मेट्रो के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से इस साल नवंबर में फंड मिलना शुरू हो जाएगा। इसके बाद मेट्रो के काम में तेजी आएगी। यह जानकारी एक बैठक में मंत्री श्री सिंह को अधिकारियों ने दी। श्री सिंह को जानकारी दी कि भोज मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के रूट को दिसंबर 2021 तक शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य रूट के लिए जल्द ही टेंडर किए जा रहे हैं।

श्री सिंह को जानकारी दी कि भोज मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के रूट को दिसंबर 2021 तक शुरू कर दिया जाएगा।

मेट्रो के लिए 2020 तक यूरोपियन बैंक से फंड की उम्मीद
मेट्रो के लिए 2020 तक यूरोपियन बैंक से फंड की उम्मीद

मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि करोंद से एयरपोर्ट तक मेट्रो की डीपीआर जल्द बनाई जाए। जयवर्धन सिंह ने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट के हर काम की समय-सीमा तय की जाए और उसी समय में काम पूरा कर लिया जाए।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि मेट्रो प्रोजेक्ट में प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास के लिए राजस्व अधिकारियों की कमी है। इस पर मंत्री ने कहा कि इस मामले में फाइल चलाने की बजाय जल्द ही मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्य सचिव एसआर मोहंती से बातचीत कर प्रतिनियुक्ति पर डिप्टी कलेक्टर और राजस्व विभाग के अधिकारी लिए जाएंगे। वहीं एक्सपर्ट की स्टाफ की भर्ती विज्ञापन निकालकर की जाएगी। मेट्रो प्रोजेक्ट में राज्य सरकार ने कुछ बदलाव किया है। मेट्रो को मंडीदीप-औबेदुल्लागंज ले जाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि मंडीदीप जाने वाली एम्स से बागसेवनिया होते हुए जाएगी। इससे प्रोजेक्ट पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च बढ़ जाएगा। वहीं करोंद से एयरपोर्ट तक मेट्रो पहुंचाने पर भी करोड़ों रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। यह फंड कैसे मिलेगा, यह फिलहाल तय नहीं है।गौरतलब है कि मेट्रो कंपनी ने दिल्ली मेट्रो कंपनी को चिठ्ठी लिखकर दक्ष इंजीनियर मांगे हैं। मेट्रो को लेकर फंड के अलावा अभी इस फील्ड के एक्सपर्ट स्टाफ की कमी भी कंपनी को महसूस हो रही है।

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