witnessindia
Image default
Law Politics Social World

महाराष्ट्र: शिवसेना का सपना टूटा, राष्ट्रपति शासन की ओर राज्य

मुंबई(ईएमएस)। महाराष्ट्र में सोमवार की शाम को राजनीतिक घटनाक्रम किसी थ्रिलर और सस्पेंस फिल्म की तरह चला। जिसमें शिवसेना द्वारा दिन भर सरकार और अपना मुख्यमंत्री बनाने का देखा सपना अंतत: टूट गया। वहीं गेंद एनसीपी के पाले में आ गई कि क्या वह सरकार बना सकती है। एनसीपी आज पत्ते खोलेगी, उसके पास रात 8.30 बजे तक का वक्त है। अगर इस डेडलाइन तक एनसीपी सरकार बनाने के लिए समर्थन हासिल नहीं कर पाई तो फिर राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन का विकल्प होगा।
रविवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकार बनाने की इच्छा और दावे के पत्र के लिए शिवसेना को 24 घंटे दिए थे। मगर इन समयावधि में शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी से समर्थन की चि_ी हासिल नहीं कर सकी। राजनीतिक समीकरण बदले इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण एकाएक बदल गए हैं। शाम तक शिवसेना को समर्थन देकर उसकी सरकार बनवाने की जिम्मेदारी लेने वाली एनसीपी अब सरकार बनाने की स्थिति में होगी लेकिन समस्या यही है कि उसके पास कांग्रेस को मिलाकर भी 288 की विधानसभा में जरूरी 145 का जादुई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में सबकी नजर इस पर होगी कि क्या शिवसेना इस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए समर्थन देगी। ऐसा हुआ तो शिवसेना के लिए बहुत ही हास्यास्पद स्थिति बन जाएगी क्योंकि भाजपा के साथ गठबंधन में उसे सरकार में नंबर दो की पोजिशन मिल रही थी।

महाराष्ट्र में सोमवार की शाम को राजनीतिक घटनाक्रम किसी थ्रिलर और सस्पेंस फिल्म की तरह चला।

महाराष्ट्र: शिवसेना का सपना टूटा, राष्ट्रपति शासन की ओर राज्य
महाराष्ट्र: शिवसेना का सपना टूटा, राष्ट्रपति शासन की ओर राज्य

जिस मुख्यमंत्री पद के लिए वह अड़ी थी, वह अब उसे किसी हाल में नहीं मिलेगा। जानकारों के अनुसार शिवसेना के सामने अब एनसीपी यह प्रस्ताव रख सकती है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए उसे साथ में आना चाहिए। शिवसेना ने चुकाई भारी कीमत शिवसेना ने राज्य में सरकार बनाने का सपना देखते हुए, अपने अडिय़ल रवैये से भारी कीमत चुकाई है। सुबह उसके मंत्री अरविंद सावंत ने नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। अब शिवसेना केंद्र सरकार से भी बाहर है और राज्य में भी न उसकी सरकार बन रही है और न ही मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल रही है। उसकी स्थिति माया मिली न राम वाली हो गई है। अब सबकी नजरें इस पर है कि क्या शिवसेना की राहें एनडीए से भी जुदा हो जाएंगी? एनसीपी ने शिवसेना के सामने रविवार को शर्त रखी थी कि अगर वह सरकार बनाने के लिए समर्थन चाहती है तो केंद्र सरकार में उसके मंत्री को इस्तीफा देना होगा और उसे भाजपा से सारे संबंध तोडऩे होंगे।खिल गए भाजपाइयों के चेहरे सोमवार को दिन भर तनाव में दिखने वाले भाजपा नेताओं के चेहरे शाम को शिवसेना के हाथ से खिसकी बाजी के बाद खिल गए। राज्यपाल द्वारा एनसीपी से सरकार बनाने का इरादा जानने के बाद भाजपा ने मंगलवार को टाली हुई अपनी राज्य कोर कमेटी की बैठक आनन-फानन में बुलाई। इस बैठक के बाद भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने मीडिया से कहा कि हम सारे राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए हैं। हम वेट एंड वॉट की भूमिका में है। राज्य की राजनीति को लेकर कोई भी ठोस फैसला समय आने पर करेंगे।

इंद्रावती बचाओ जनजगरण अभियान के सदस्यों ने दलपत सागर में की सफाई

अभी भी कांग्रेस के पाले में है गेंद!भाजपा से नाता तोड़ जब शिवसेना ने एनसीपी का साथ लेने का सोचा तो इस कहानी में कांग्रेस का भी अहम किरदार सामने आया। कांग्रेस के कई विधायकों ने शिवसेना का साथ देने की बात कही, लेकिन अंतिम फैसला सोनिया गांधी के हाथ में ही रहा. कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक हुई, लेकिन उसमें तय नहीं हो पाया कि समर्थन देना है या नहीं। आज कांग्रेस पार्टी समर्थन के मसले पर फाइनल फैसला लेगी।शिवसेना के पास अब भी है मौका हालांकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव अविनाश पांडे ने कहा कि हमें लगता है कि अभी तक राजभवन ने शिवसेना के दावे को खारिज नहीं किया है। वहां से बस समर्थन पत्र देने के लिए मांगी गई मोहलत को आगे नहीं बढ़ाया है। हमारे विचार में, शिवसेना का दावा अभी भी मान्य है और जैसे ही शिवसेना समर्थन के कागजात लेकर वहां पहुंचेगी तो राज्यपाल उसे मना नहीं करेंगे। भाजपा बोली- हम वेट एंड वॉच की भूमिका मेंमहाराष्ट्र में सरकार के गठन के लिए शर्तों और वादों का दौर चल रहा है। शिवसेना को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने और समय देने से मना कर दिया, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित भी कर दिया। उधर, भाजपा इन सभी स्थितियों पर करीब से नजर बनाए हुए है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि हम वेट एंड वॉच की भूमिका में हैं। दिल्ली स्थित सोनिया गांधी के आवास पर महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की थी। उस दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी उनसे बात की थी। कांग्रेस ने कहा है कि वह शिवसेना को समर्थन देने के मामले में एनसीपी के साथ और चर्चा करना चाहती है। ऐसे में अब तक साफ नहीं हो पाया है कि कांग्रेस शिवसेना का समर्थन करेगी या नहीं।

महाराष्ट्र संकट: गवर्नर का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को न्योता

गवर्नर के सामने रहेंगे ये विकल्प
1- जब तक नया मुख्यमंत्री नहीं मिल जाता, तब तक राज्यपाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले देवेंद्र फडणवीस को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने के लिए कह सकते हैं। संविधान के तहत यह जरूरी नहीं है कि मुख्यमंत्री का कार्यकाल विधानसभा के साथ ही खत्म हो जाए।
2- राज्यपाल विधानसभा चुनाव नतीजों में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी के किसी नेता को मुख्यमंत्री बना सकते हैं। ऐसे में बीजेपी का सीएम बन सकता है क्योंकि बीजेपी ने सबसे ज्यादा 105 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीएम बनने के बाद बीजेपी को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। फिलाहाल जो हालात हैं, उससे लगता नहीं कि बीजेपी फ्लोर टेस्ट में पास हो पाएगी।
3- भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र विधानसभा से अपने नेता को चुनाव के जरिये चुनने को कह सकते हैं। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आधार पर किया जा सकता है। वर्ष 1998 में शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में ऐसा करने का आदेश दिया था।
4- अगर इन तीनों विकल्पों के माध्यम से कोई सरकार नहीं बन पाती है तो राज्?यपाल के सामने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। यह अंतिम विकल्प है। इस स्थिति में राज्य के विधायी कामकाज की बागडोर केंद्र सरकार के हाथ में रहेगी। फिलहाल राज्य में जैसी स्थितियां हैं, उसमें राष्ट्रपति शासन लगने की ही संभावना प्रबल है। हालांकि कोई भी पार्टी इसके समर्थन में नहीं दिख रही है। कांग्रेस ने खुले तौर पर कहा है कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का समर्थन नहीं करती है।

Related posts

सिर से जुड़े जुड़वां भाईयों को सर्जरी के दो वर्ष बाद एम्स से मिली छुट्टी

Publisher

जस्टिस बोबडे ने कहा- न्यायपालिका में आरक्षण की जरूरत नहीं

Publisher

मोटापे की संभावना नहीं रहती ऑपरेशन सिजेरियन डिलिवरी से हुए बच्चों में

Publisher

Leave a Comment