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महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात देखते हुए तीसरी बार लगा हैं राष्ट्रपति शासन

नई दिल्ली (ईएमएस)। महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात देखते हुए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश को स्वीकार करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। महाराष्ट्र में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद अब तक सात बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। आजादी के बाद से अब तक भारत के अलग-अलग राज्यों में 126 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है।

1980 में लगा पहली बार राष्ट्रपति शासन
आजादी के बाद महाराष्ट्र में पहली बार 17 फरवरी 1980 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस वक्त शरद पवार मुख्यमंत्री थे। उनके पास बहुमत था, राजनीतिक हालात बिगड़ने पर विधानसभा भंग कर दी गई थी। ऐसे में 17 फरवरी से आठ जून 1980 तक करीब 112 दिन तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा था।

मोदी के कार्यकाल में सातवीं बार लगा राष्ट्रपति शासन

2014 में दूसरी बार लगा राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन 28 सितंबर 2014 को लगाया गया था। सन 2014 में चुनाव होने से ठीक पहले सत्ता में कांग्रेस थी। कांग्रेस अपने सहयोगी दल एनसीपी सहित अन्य दलों के साथ अलग हो गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने विधानसभा भंग कर दी थी। इस तरह से कांग्रेस-एनसीपी का 15 साल पुराना गठबंधन टूट गया था। ऐसे में 28 सितंबर 2014 से लेकर 30 अक्तूबर यानी 32 दिनों तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा।

महाराष्ट्र में तीसरी बार लगा हैं राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में तीसरी बार लगा हैं राष्ट्रपति शासन

12 नवंबर को तीसरी बार राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन 12 नवंबर 2019 को लगाया गया। 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत था, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर दोनों के अड़ जाने के चलते सरकार नहीं बन सकी। हालांकि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पहले भाजपा को सरकार बनाने का अमंत्रण दिया, लेकिन देवेंद्र फडनवीस ने अपने कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद गवर्नर ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उद्धव ठाकरे भी निर्धारित समय सीमा पर बहुमत का समर्थन पत्र नहीं सौंप सके। इसके बाद एनसीपी को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दिया, लेकिन पार्टी ने समर्थन पत्र देने के लिए तीन दिन का समय मांगा। इसी का नतीजा था कि राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की, जिस पर कैबिनेट ने मुहर लगाई और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी।

मोदी के कार्यकाल में सात बार लगा राष्ट्रपति शासन
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने से बाद महाराष्ट्र पहला राज्य नहीं है, जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हो। सन 2014 के बाद से देश के चार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। इसमें महाराष्ट्र, उत्तराखंड, अरुणांचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य भी शामिल हैं। मोदी सरकार के आने के बाद उत्तराखंड ने साल 2016 में दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। पहले 25 दिन और बाद में 19 दिनों के लिए राष्ट्रपति शासन लगा। कांग्रेस में पहले फूट पड़ने के बाद राष्ट्रपति शासन लगा और दूसरी बार मई में विधायकों के दलबदल के चलते एक बार फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। कांग्रेस इस मामले को लेकर हाई कोर्ट पहुंच गई, जहां से तत्कालीन हरीश रावत सरकार को राहत मिली थी। कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ अपना निर्णय दिया था। इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश में सन 2016 में 26 दिनों के राष्ट्रपति शासन लगा था, जब कांग्रेस के 21 विधायकों ने 11 भाजपा और दो निर्दलीय विधायकों के साथ हाथ मिला लिया था और राज्य सरकार अल्पमत में आ गई थी। बाद में राष्ट्रपति शासन को कांग्रेस ने कोर्ट में चुनौती दी थी और कोर्ट ने कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया था। इसी तरह जम्मू कश्मीर में दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर में जून 2018 में भाजपा ने पीडीपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जिसके बाद सीएम महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा देने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। राष्ट्रपति शासन के दौरान ही राज्य में आर्टिकल 370 को रद्द कर दिया गया और राज्य से विशेष राज्य का दर्जा भी वापस ले लिया गया। इससे पहले सन 2015 में विधानसभा चुनावों में एक खंडित फैसले के बाद सरकार गठन में विफलता के चलते राज्य में केंद्रीय शासन लागू किया गया था।

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