witnessindia
Image default
Law Politics Social World

पीएम या सीएम अदालत का फैसला मानने के लिए बाध्य: कोर्ट

नई दिल्ली(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले के बाद बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन पर कड़ा एतराज जताया है। कोर्ट ने कहा है कि जब कोर्ट कोई फैसला सुनाता है तो उसे मानना सभी के लिए बाध्यकारी होता है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री। जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन और जस्टिस डीवाई चंदचूड़ ने बहुमत द्वारा इस मामले को सात सदस्यीय पीठ के पास भेजने से इत्तफाक न रखते हुए कहा है कि जो भी हमारे फैसले में सहयोग देने का काम नहीं करता है, वह अपने संकट की स्थिति में ऐसा करता है। जहां तक केंद व राज्य के मंत्रियों और सांसद व विधायकों का सवाल है अगर वे ऐसा करते हैं तो वे भारत के संविधान की मर्यादा कायम रखने, संरक्षण और रक्षा करने की संवैधानिक शपथ का उल्लंघन करेंगे।

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले बाद बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन पर एतराज जताया है।

पीएम या सीएम अदालत का फैसला मानने के लिए बाध्य: कोर्ट
पीएम या सीएम अदालत का फैसला मानने के लिए बाध्य: कोर्ट

स्वस्थ आलोचना करने की इजाजतजस्टिस नरीमन द्वारा लिखे गए इस फैसले में कहा गया है कि फैसले को लेकर स्वस्थ आलोचना करने की इजाजत है भले ही वह फैसला देश की सबसे बड़ी अदालत का ही क्यों न हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विफल करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की इजाजत हमारा संविधान नहीं देता। जस्टिस नरीमन ने केरल सरकार को टेलीविजन, समाचार पत्रों आदि माध्यमों से इस फैसले का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार को लोगों का भरोसा जीतने के लिए कदम उठाना चाहिए और अदालत के फैसले को लागू करने के लिए व्यापक आधार पर विचार-विमर्श करने के बाद तौर-तरीका बनाना चाहिए। इस विचार विमर्श की प्रक्रिया में समुदाय के सभी खंड की बातों पर गौर करना चाहिए।

Related posts

राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस

Publisher

मेरा पूरा ध्यान बल्लेबाजी पर रहेगा : युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ

Publisher

बोट क्लब होगा प्लास्टिक फ्री भोपाल की बड़े तालाब को प्लास्टिक फ्री किया जायेगा

Publisher

Leave a Comment