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पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों में बुलबुल तूफान ने मचाई तबाही

पुणे (ईएमएस)। पिछले दिनों आए बुलबुल तूफान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों में बहुत तबाही मचाई। तूफान के कारण बंगाल में तकरीबन 7 लोगों की जान चली गई जबकि फसलों का काफी नुकसान हुआ। इससे पहले इसी साल अप्रैल-मई में ओडिशा में फोनी तूफान ने दस्तक दी थी। मौसम विभाग की माने तो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उठने वाले तूफान की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। विभाग के मुताबिक, पिछले एक दशक में देश में तूफान की घटनाओं में 11 फीसदी की बढ़त देखी गई है। इनमें बीते पांच सालों में सबसे ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि पिछले पांच सालों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तूफान की घटनाओं में 32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो खतरे की घंटी कही जा सकती है।

बंगाल में तकरीबन 7 लोगों की चली गई जान

पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बुलबुल ने मचाई तबाही
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बुलबुल ने मचाई तबाही

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि साल 2018 और साल 2019 में देश में 7-7 तूफान आए। इससे पहले साल 1985 इतनी मात्रा में तूफान की घटनाएं देखने को मिली थीं। वहीं, गंभीर तीव्रता वाले तूफानों की बात करें तो 2018 और 2019 में कुल 6-6 भयंकर चक्रवाती तूफान आए। इससे पहले एक ही साल में 7 भयंकर तूफान साल 1976 में देखे गए थे। मौसम अधिकारियों का कहना है कि देश में तूफानों की संख्या में ऐसी बढ़ोतरी ग्लोबल वॉर्मिंग के घातक दुष्परिणामों की ओर संकेत करती है। मौसम विभाग ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत में हर साल औसतन 4 तूफान आए हैं। वहीं, पिछले पांच सालों के आंकड़े देखे जाएं तो हर साल देश में औसतन 5 तूफानों ने दस्तक दी है। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि बीते पांच सालों में देश में तूफानों की संख्या और उनकी भयावहता दोनों बढ़ी है। इनकी वजह से काफी जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। इसी साल देश में पाबुक, फोनी, वायु, क्यार और बुलबुल जैसे तूफान तबाही मचा चुके हैं।

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