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निर्भया मामले में आरोपी अक्षय की रिव्यू पिटिशन खारिज, जल्द फांसी की उम्मीद

नई दिल्ली (ईएमएस)। निर्भया के दोषियों और फांसी के फंदे के बीच बुधवार को एक बड़ी रुकावट खत्म हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दोषी अक्षय की रिव्यू पिटिशन को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साथ में यह कहा कि दोषी तय समय में दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, रिव्यू पिटिशन खारिज होने का सीधा मतलब हैं कि जल्द ही निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया जाएगा। केन्द्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों को रिव्यू के लिए 1 हफ्ते और राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जा सकता है। अक्षय के मामले में रिव्यू का निपटारा हो चुका है इस तरह अभी अक्षय को दया याचिका दायर करने की मोहलत मिलेगी। अभी राष्ट्रपति के पास एक और दोषी विनय की दया याचिका लंबित है। राष्ट्रपति के द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद ही फांसी होगी।

आरोपियों के वकील ने कहा, क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल होगी

इसके पहले बुधवार को अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में उसका पक्ष रखने वाले वकील ए पी सिंह ने फैसले के बाद अदालत के बाहर जो कुछ भी कहा, उससे साफ है कि बचाव पक्ष मामले को लटकाने की कोशिश करेगा। एपी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले (रिव्यू पर नहीं) के बाद नए तथ्य सामने आए हैं कि निर्भया के दोस्त ने पैसे लेकर मीडिया को कहानियां सुनाई है। उन्होंने कहा कि नए तथ्यों के आने के बाद नए सिरे से केस को सुना जाना चाहिए। अक्षय के अलावा बाकी 3 दोषियों ने अभी रिव्यू पिटिशन दाखिल नहीं किया है। इसके जरिए भी बचाव पक्ष मामले को लटकाने की कोशिश कर सकता है। निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद फांसी से बचने के लिए चारों दोषियों की उम्मीद उन 17 मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिक गई है,जिसमें कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था।

निर्भया मामले में आरोपी अक्षय की रिव्यू पिटिशन खारिज, जल्द फांसी की उम्मीद
निर्भया मामले में आरोपी अक्षय की रिव्यू पिटिशन खारिज, जल्द फांसी की उम्मीद

रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि वह आज या कल मैं क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल कर और सुप्रीम कोर्ट के सामने 2017 के बाद के उन सभी 17 मामलों की लिस्ट रखने वाले हैं, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। रिव्यू पिटिशन अगर खारिज हो जाए तो मुजरिम क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डीबी गोस्वामी बताते हैं कि क्यूरेटिव पिटिशन में जजमेंट पर तकनीकी तौर पर सवाल उठाया जा सकता है। जजमेंट के कानूनी पहलू को देखा जाता है और अगर किसी पहलू को नहीं देखा गया है तो उस मुद्दे को क्यूरेटिव पिटिशन में उठाया जाता है अगर क्यूरेटिव पिटिशन भी खारिज हो जाए उसके बाद मुजरिम को दया याचिका दायर करने का अधिकार है। रिव्यू और क्यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर किए जाने का प्रावधान है।

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