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(नई दिल्ली) खतरनाक होता है साइलंट हार्ट अटैक, कभी खुल कर सामने नहीं आते लक्षण

नई दिल्ली (ईएमएस)। क्या आपने कभी सोचा है कि आपको हार्ट अटैक आए, लेकिन आपको उसका पता भी न चले। यह सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन सच है। इस तरह के हार्ट अटैक को साइलंट हार्ट अटैक कहते हैं और इसके लक्षण खुलकर सामने नहीं आते। उदाहरण के लिए- 70 साल की एक महिला को जब हार्ट अटैक आया और डॉक्टरों ने अस्पताल में उनकी जांच की तो पता चला कि यह उस महिला का पहला हार्ट अटैक नहीं था। हार्ट को हुए नुकसान की जांच करने के लिए जो टेस्ट किए गए थे उनसे पता चला कि हार्ट में कुछ डेड मसल्स भी थे जिसकी वजह पहले हुए हार्ट अटैक थे, जिनका किसी को पता ही नहीं चला था। साइलंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या एसएमआई इस बारे में डॉक्टरों ने बताया कि उस महिला को पूर्व में कभी साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या एसएमआई हुआ था। इसे साइलंट इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि इस दौरान होने वाले कोई भी लक्षण ऐसे नहीं होते, जिसके लिए डॉक्टर के पास जाने या मेडिकल अटेंशन की जरूरत पड़े।

क्या आपने कभी सोचा है कि आपको हार्ट अटैक आए, लेकिन आपको उसका पता भी न चले।

(नई दिल्ली) खतरनाक होता है साइलंट हार्ट अटैक, कभी खुल कर सामने नहीं आते लक्षण
(नई दिल्ली) खतरनाक होता है साइलंट हार्ट अटैक, कभी खुल कर सामने नहीं आते लक्षण

दुनियाभर में इस तरह के लाखों लोग हैं, जो इस तरह के साइलंट हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं। ऐसे लोगों में गंभीर हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिससे उनकी मौत होने की आशंका भी बढ़ जाती है। सामान्य हार्ट अटैक जिसकी पहचान हो जाती है, वह एक वॉर्निंग की तरह है कि मरीज को अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है ताकि कार्डिऐक रिस्क को कम किया जा सके। इसके लिए डायट और एक्सर्साइज के साथ-साथ जरूरी दवाईयां भी दी जाती हैं। आइसलैंड और फिनलैंड में पिछले दिनों हुए कुछ अध्ययनों में यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर एसएमआई यानी साइलंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कैसे होता है, कब होता है और इससे जुड़े परिणाम क्या और कैसे हो सकते हैं। जुलाई 2019 में जामा कार्डियॉलजी नाम के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 5 हजार 869 महिलाओं और पुरुषों की ऑटोप्सी रिपोर्ट शामिल थी। इन सभी की औसत उम्र 65 साल थी और इन सभी की उत्तरी फिनलैंड में अचानक मौत हुई थी। 5869 लोगों में से 1 हजार 322 लोगों में साइलंट हार्ट अटैक के सबूत मिले थे और इन लोगों में पहले से किसी भी तरह की कोरोनरी आरट्री डिजीज नहीं थी।

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के ऑथर्स की मानें तो जिन लोगों को साइलंट हार्ट अटैक आता है वे इसके लक्षणों से अनभिज्ञ होते हैं इसलिए वे अपने शारीरिक परिश्रम को कंट्रोल नहीं कर पाते। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के कार्डियॉलजिस्ट डॉ रॉबर्ट ओ बोनो की मानें तो साइलंट हार्ट अटैक हमेशा ही साइलंट नहीं होता बल्कि इसके कुछ लक्षण दिखते हैं जैसे- सीने में असहजता महसूस होना, हार्टबर्न यानी सीने में जलन, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ होना आदि। इस तरह की चीजें आए दिन बड़ी संख्या में लोगों को होती है लेकिन लोग इसे मामूली गैस या ऐसिडिटी की दिक्कत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर महिलाओं में इस तरह के लक्षण अस्पष्ट या अज्ञात होते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक आया है।

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