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डिफेंस सेक्टर में देश का निर्यात अच्छा, आगे भी बढ़ोतरी की संभावना : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली (ईएमएस)। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। देश के कुल रक्षा उत्पादन में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी अब 20 फीसदी से अधिक हो गई है और आने वाले समय में इसमें और बढ़ोतरी होगी। रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में सिंह ने बताया कि डिफेंस सेक्टर में देश का निर्यात अच्छा है और आने वाले समय में इसमें काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है। पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी रक्षा मंत्री ने अपनी समस्याओं पर ध्यान देने और आतंकवाद छोड़ने की सीख दी। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को पाकिस्तान उठा रहा है, लेकिन उसे विश्व समुदाय से कुछ खास समर्थन नहीं मिल रहा। रक्षा मंत्री ने पड़ोसी देश को नसीहत देते हुए कहा, ‘पाकिस्तान को कश्मीर को छोड़कर अपने क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए।

देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है

डिफेंस सेक्टर में देश का निर्यात अच्छा, आगे भी बढ़ोतरी की संभावना : राजनाथ सिंह
डिफेंस सेक्टर में देश का निर्यात अच्छा, आगे भी बढ़ोतरी की संभावना : राजनाथ सिंह

पाकिस्तान की सीमाओं के अंदर ही कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां काफी परेशानी है। अगर वह आतंक के रास्ते पर चलता रहा तो उसका विनाश निश्चित है। पाकिस्तान अगर नहीं संभलता है तो 1971 (अलग राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण) के जैसे हालात बन सकते हैं।’ सिंह ने कहा कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता तो उसे बड़ा नुकसान होगा। वह खुद को विनाशकारी रास्ते पर ले जाने से बचा नहीं सकेगा। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘पड़ोसी देश को कश्मीर का मुद्दा उठाने के बजाय अपनी आंतरिक समस्याओं को सुलझाना चाहिए।’ रफाल डील को लेकर विपक्ष के आरोपों को वोटरों ने नकार दिया और भाजपा को सीटों की अधिक संख्या के साथ दोबारा सरकार बनाने का मौका मिला।अपने पहले इंटरव्यू में बतौर रक्षा मंत्री अपनी प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा, ‘डिफेंस सेक्टर में सरकारी कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। सिंह हाल ही में पहला रफाल फाइटर जेट प्राप्त करने फ्रांस गए थे और उन्होंने इस एयरक्राफ्ट में उड़ान भी भरी थी।

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उन्होंने बताया, ‘हमारा लक्ष्य सेनाओं को देश में रिसर्च से बने इक्विपमेंट से लैस करना है।’ उन्होंने कहा कि कई प्राइवेट कंपनियां अब ग्लोबल सप्लाइ चेन में शामिल हैं और डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन देश में नई टेक्नॉलजी डिवेलप कर रहा है। इन तकनीक के इस्तेमाल से इंडस्ट्री के साथ साझेदारी मे उत्पादन किया जाएगा। सिंह ने उम्मीद जताई कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत हेलिकॉप्टर और सबमरीन की मैन्युफैक्चरिंग निर्धारित समयसीमा में होगी। रक्षा क्षेत्र में निर्माण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उनका कहा कि आने वाले वर्षों में डिफेंस सेक्टर में निर्यात को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया, ‘कुछ वर्ष पहले तक रक्षा निर्यात बहुत कम था। 2018-19 में यह 10,745 करोड़ रुपये पर पहुंचा और इस फाइनेंशियल ईयर में इसे 15,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।’ रफाल डील को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ‘मजबूत और निर्णायक’ कदम बताते हुए सिंह ने कहा कि रफाल से वायु सेना की मौजूदा जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। रक्षा मंत्रालय अभी 83 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) की मैन्युफैक्चरिंग के लिए ऑर्डर को अंतिम रूप दे रहा है।

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