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टूथपेस्ट में मलेरिया का इलाज छिपा हुआ है मलेरिया को जड़ से खत्म करेगा टूथपेस्ट

नई दिल्ली (ईएमएस)। गर आपको कहे कि रोज के इस्तेमाल में आने वाले टूथपेस्ट में मलेरिया का इलाज छिपा हुआ है, तो क्या आप इसका यकीन करेंगे। दरअसल, हाल ही में लंदन में हुए एक शोध में पता चला कि टूथपेस्ट, साबुन और डिटरजेंट से मलेरिया का इलाज हो सकता है। रिसर्च में सामने आया कि टूथपेस्ट, साबुन और डिटरजेंट में एक ऐसा तत्व ट्राइक्लोजन पाया जाता है, जो मलेरिया के बैक्टीरिया को आसानी से मार सकता है। ये बैक्टीरिया मलेरिया के बैक्टीरिया की बढ़ोत्तरी को रोक देता है। मलेरिया के इलाज के लिए आने वाली दवाई पिरिमेथामाइन डीएचईआर पर हमला करती है।

रिसर्च में सामने आया कि टूथपेस्ट, साबुन और डिटरजेंट में एक ऐसा तत्व ट्राइक्लोजन पाया जाता है, जो मलेरिया के बैक्टीरिया को आसानी से मार सकता है।

शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च में ये साबित किया कि ट्राइक्लोजन मलेरिया के उन परजीवियों पर भी कारगर साबित हुआ, जो पिरिमेथामाइन से लड़ने में सक्षम थे। ब्राजील स्थित विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और मुख लेखक एलिजाबेथ बिल्सलैंड ने बताया कि रोबोट वैज्ञानिक ईव की खोज कि ट्राइक्लोजन मलेरिया से लड़ने में सक्षम है, जिसके बाद हमें यह उम्मीद जागी है कि इसे विकसित कर एक नई दवाई बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह एक सुरक्षित यौगिक है और मलेरिया परजीवियों के जीवनचक्र के दो बिंदुओं पर हमला करने की इसकी क्षमता से पता चलता है कि मलेरिया परजीवी के लिए इसका प्रतिरोध करना मुश्किल हो जाएगा।

 टूथपेस्ट में मलेरिया का इलाज छिपा हुआ है मलेरिया को जड़ से खत्म करेगा टूथपेस्ट
टूथपेस्ट में मलेरिया का इलाज छिपा हुआ है मलेरिया को जड़ से खत्म करेगा टूथपेस्ट

बता दें कि टूथपेस्ट में ट्राइक्लोजन होने पर यह लिवर में फैटी एसिड को बनाने में सहायक इनोयल रिडक्टेज (ईएनआर) नामक एक एंजाइम को निष्क्रिय कर प्लेग के जीवाणु को बनने से रोकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जैसा कि ट्राइक्लोजन ईएनआर और डीएचईआर को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए इसका लिवर और ब्लड पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। गौरतलब है कि अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेरिया के कारण प्रतिवर्ष 5 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। मलेरिया से लड़ने के लिए जहां कई प्रकार की दवाइयां मौजूद हैं, तो मलेरिया परजीवियों में भी इन दवाइयों से लड़ने की क्षमता तेजी से बढ़ने लगी है। इससे भविष्य में मलेरिया के लाइलाज होने की आशंका बढ़ गई है।

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