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कट से उबारने आईडीबीआई बैंक को केंद्र सरकार देगी 9 हजार 296 करोड़ रुपए का पैकेज

नई दिल्ली (ईएमएस)। मंदी के चलते निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों की हालत भी हस्ताहाल है। संकट से जूझते आईडीबीआई बैंक को उबारने के लिए केंद्र सरकार ने उसमें 9,296 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का फैसला किया है। यह पूंजी सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा मिलकर दी जाएगी। कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि बैंकिंग सेक्टर की हालत खराब है और सरकार इस पूरे सेक्टर पर गहराई से नजर रखे हुए है। सरकार को हाल में रिजर्व बैंक ने 1,76 लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया था, जिसके बाद ही इस बात की संभावना मजबूत हो गई थी कि सरकार परेशान चल रहे बैंकों की मदद करेगी।

कर्ज में डूबे आईडीबीआई बैंक को उबारने के लिए उसमें 51 फीसदी की हिस्सेदारी ली है।


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिनों पहले ही कहा है कि सार्वजनिक बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन यानी नए सिरे से पूंजी डालने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। योजना के अनुसार आईडीबीआई बैंक को सरकार 4,553 करोड़ रुपये और एलआईसी 4,743 करोड़ रुपये देगी। पिछले साल ही एलआईसी ने आईडीबीआई में 51 फीसदी की हिस्सेदारी ली है और इसमें सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार के इस कदम से आईडीबीआई बैंक की पहले साल में आय करीब 500 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पब्‍लिक सेक्‍टर के आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट सेक्‍टर के बैंक की कैटेगरी में रख दिया है। दरअसल, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने कर्ज में डूबे आईडीबीआई बैंक को उबारने के लिए उसमें 51 फीसदी की हिस्सेदारी ली है।
आईडीबीआई की वेबसाइट के मुताबिक उसके 1892 ब्रांच हैं जबकि 1407 सेंटर हैं। वहीं बैंक के एटीएम 3705 हैं। बैंक से लाखों ग्राहक जुड़े हैं। आईडीबीआई बैंक को आरबीआई के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई रूपरेखा के अंतर्गत रखा गया है। यह कंपनियों को दिये जाने वाले लोन और शाखा विस्तार, वेतन वृद्धि के अलावा अन्य नियमित गतिविधियों पर रोक लगाता है।
विपिन/ ईएमएस/ 03 सितंबर 2019

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