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आरसीईपी मुक्त व्यापार समझौते से देश के किसानों को होगा आर्थिक नुकसान

खरगोन (ईएमएस)। केंद्र सरकार द्वारा आसियान देशों से रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) व्यापार समझौते की चल रही कवायदों की मिली सूचना पर शुक्रवार को राष्ट्रीय किसान मजदूरी महासंघ ने आपत्ति जताते हुए जिला मुख्यालय पर प्रधानमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपते हुए उक्त समझौते पर रोक लगाने की मांग की। महासंघ के जिलाध्यक्ष रामेश्वर गुर्जर, अश्विन तोमर, आबिद खान आदि ने बताया कि रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) कई देशों के बीच होने वाला एक मुक्त व्यापार समझौता है। जिसमें आसियान के 10 देश, चीन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलेंड, दक्षिण कोरिया और जापान से आयात किए जाने वाले कृषि एवं दूध उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि यह समझौता अभी तक पूरी तरह से अमल में नहीं लाया जा सका है। अगर यह लागू हो गया तो विदेशों से भारत में दूध का आयात किया जाएगा। इससे दूध उत्पादन करने वाले भारतीय किसानों के आमदनी प्रभावित हो जाएगी।

केंद्र सरकार द्वारा आसियान देशों से रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) व्यापार समझौते की चल रही

आरसीईपी मुक्त व्यापार समझौते से देश के किसानों को होगा आर्थिक नुकसान
आरसीईपी मुक्त व्यापार समझौते से देश के किसानों को होगा आर्थिक नुकसान

प्रदेश सरकार से कि समस्याओं के निराकरण की मांगमहासंघ ने आरसीइपी मुक्त व्यापार समझौते पर रोक के साथ ही प्रदेश सरकार से किसानों की समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर भी ज्ञापन सौंपा। महासंघ के देवनारायण पटेल, नंदराम गुर्जर, रमेश यादव, कांशीराम यादव आदि ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा वचन पत्र में प्रत्येक किसान का 2 लाख रुपए कर्ज माफ करने का वचन दिया था, जो सरकार बनने के 8 माह बाद भी पूरा नहीं हुआ है, इससे किसानों के बीच असमंजस स्थिति निर्मित हो रही है, उन्हें न तो सोसायटी से दूसरा कर्ज मिल रहा न ही पिछला माफ होने की जानकारी। किसानों ने मांग की है कि प्रदेश के सभी किसानों के कर्जमाफी सहित इस वर्ष हुई अतिवृष्टि से खराब फसलों की क्षतिपुर्ति एवं बीमा क्लेम कि राशि जल्द किसानों को दी जाए जिससे वे रबी फसलों की तैयारी कर सके।

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