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आगामी टोक्यो ओलंपिक में बजरंग, मैरी कॉम और जेरेमी से उम्मीदें

आगामी टोक्यो ओलंपिक में भारत को महिला मुक्केबाजा एम सी मैरी कॉम,पहलवान बजरंग और भारोत्तोलक जेरेमी लालरिनुंगा से काफी उम्मीदें हैं।
बजरंग
पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा कि टोक्यो में अगले साल होने वाले ओलंपिक खेलों में वह नये रुप में नजर आयेंगे। बजरंग से भारतीय टीम को टोक्यो ओलिंपिक में पदक की उम्मीदें हैं। बजरंग का अब तक का प्रदर्शन बेहद अच्छा रहा है हालांकि ‘लेग डिफेंस’ उनकी सबसे बड़ी कमजोरी रही है और उनके विरोधियों ने इसका हमेशा से ही लाभ उठाया है। कई विशेषज्ञों को मानना है कि ओलिंपिक में यह कमजोरी बजरंग पर भारी पड़ सकती है हालांकि इस कमजोरी के बाद भी यह भारतीय पहलवान 2018 में 65 किलो वर्ग में विश्व का नंबर एक पहलवान रहा है। उन्होंने कहा,‘मेरे कोच का कहना है कि दोबारा मैट पर उतरने पर मुझे अपने विरोधी को हैरान करना होगा। इसलिए टोक्यो में आपको मैट पर एक नया बजरंग दिखेगा।’ उन्होंने कहा,‘लोग कहेंगे कि बजरंग का खेल बिल्कुल बदल गया है। चाहे तकनीक हो, दम खम या शैली, सभी पर मैंने काम किया है।’ नए सत्र में इस पहलवान का पहला टूर्नामेंट जनवरी में होगा। इसके लिए वह तैयारियों में लगे हैं।

बजरंग से भारतीय टीम को टोक्यो ओलिंपिक में पदक की उम्मीदें हैं।

मैरी कॉम
अनुभवी महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने युवा मुक्केबाज निकहत जरीन को ट्रायल में हराकर ओलिंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। हालांकि उनके प्रवेश के साथ ही विवाद भी हुआ। अब वह इस विवाद को पीछे छोड़कर ओलंपिक में स्वर्ण जीतना चाहेंगी। इस मुकाबले में जीत के बाद मैरी कॉम ने जरीन से हाथ मिलाने से भी इंकार कर दिया और कहा कि मुझे ऐसे लोग पसंद नहीं हैं। मैरी कॉम ने जरीन को नसीहत देते हुए आगे कहा कि अगर कुछ साबित ही करना है तो रिंग के भीतर साबित करो, रिंग से बाहर नहीं। मैरी कॉम ने कहा कि जगर जरीन दूसरों से सम्मान की अपेक्षा रखती हैं तो उसे दूसरों का सम्मान भी करना चाहिए। ये दोनों ही मुक्केबाज एक ही वर्ग (51 किलोग्राम) में खेलती हैं। पिछले कुछ समय से दोनों के बीच आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है। मैरी कॉम को शुरु में ओलिंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए सीधे प्रवेश दिया जा रहा था पर निकहत की आपत्ति के बाद मुक्केबाजी संघ को ट्रायल के लिए तैयार होना पड़ा।

ओलंपिक में बजरंग, मैरी कॉम और जेरेमी से उम्मीदें
ओलंपिक में बजरंग, मैरी कॉम और जेरेमी से उम्मीदें

जेरेमी लालरिनुंगा
युवा ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय भारोत्तोलक जेरेमी लालरिनुंगा 2020 टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाने के प्रयास में लगे हैं। जेरेमी ने इस साल 67 किग्रा भार वर्ग में दो रजत पदक जीते है। इस 17 वर्षीय खिलाडी ने कहा, ‘‘ मैं 2020 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने की तैयारी कर रहा हूं। थाईलैंड में ईजीएटी कप अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप और छठे कतर अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप में हालांकि उन्हें रजत पदक ही मिल पाया है पर खेलो इंडिया के पहले और दूसरे सत्र में स्वर्ण जीतने से जेरेमी उत्साहित हैं। इस खिलाड़ी ने कहा कि खेलो इंडिया से युवा खिलाड़ियों को अनुभव का अच्छा अवसर मिलता है। जेरेमी ने यह यह भी कहा है कि वह देश का प्रतिनिधित्व करके अपने पिता के सपने को पूरा कर रहे है। जेरेमी के पिता भी जूनियर मुक्केबाजी चैम्पियन रहे थे पर उन्हें कभी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पिता मेरे करियर के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। मैंने जब से भरोत्तोलन में हाथ आजमाने का फैसला किया उन्होंने तभी से मेरा पूरा साथ दिया है। वह मुक्केबाज थे, उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर अपने अनुभव मुझ से साझा किये है। वह जूनियर चैम्पियन थे पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर उन्हें नहीं मिल पाया इसलिए मैं उनके सपने को साकार कर रहा हूं।

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